एक शख्स है ऐसा
जिसका साया भी
मुझे हिम्मत देता है
ऊर्जा देता है कुछ करने की
ललक पैदा करता है
आगे बढ़ते रहने की
हर हाल में जो चाहता है
मैं आगे बढ़ता रहूँ
अपने सब सुखों को त्याग
सींचता है मेरा जीवन
कितना स्नेह है उसको
मुझसे कहता नहीं कभी
देख कर मेरे दुख
विचलित होता है जो
मेरे पिता हैं वो[1]
बचपन से जवानी तक
जिसने मुझे तराशा है
मेरे कन्धों पर रख हाथ उसने
हर छोटी बात सिखाई है
छोटे से छोटे रिश्ते की
अहमियत बताकर उसने
जीने की कला सिखाई है
देखो,अगर निभा ना सको तो
रिश्ता कोई बनाना नहीं
हर छोटी बात पर तुम
अपने आँसू बहाना नहीं
छोटी-छोटी खुशियाँ
समेट कर मेरे लिए
अपने हाथों मे लाता है जो
कोई और नहीं मेरे पिता हैं वो।
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