लो लम्हा-लम्हा करता
देखो वक्त गुजर गया,
कोई मिलकर वहीं रहा
कोई जाने किधर गया ।
सबने अपनी राह पकड़ली
वो प्यारा दोस्त बिछड़ गया,
हाथ पकड़ कर साथ रहे हैं
अब वक्त हाथ से फिसल गया ।
पूरा होते ही देखो पड़ाव
कारवाँ वहाँ से गुजर गया,
कुछ के लिए चली हैं राहें
कुछ के लिए वक्त ठहर गया ।
वादा था साथ चलेंगे हम
वो वादा जाने किधर गया,
भौतिक सुख की अभिलाषा में
साथी जाने किधर गया ।
Tuesday, August 31, 2010
Monday, August 30, 2010
अब तो चले आओ
भीगा भीगा सा मौसम है
रेशमी बारिश में वक्त है ठहरा,
तेरी यादों के घने कोहरे ने
मेरी साँसो पर लगा दिया है पहरा ।
पूरा शहर भीगा है अबके
घर मेरा क्यों छूट गया है,
इक पागल दीवाना बादल
किसी बात पर शायद रूठ गया है ।
तू आयेगा शायद अब
घर आँगन मेरा महक रहा है,
प्यार तेरा सीने में मेरे
ज्वालामुखी बन दहक रहा है ।
बावरा मन मयूर मेरा होले से
कानों में कुछ बोल गया है,
जिस्म की बात कहूँ क्या तुझसे
अब तो मन भी मेरा डोल गया है ।
रिश्ते नाते सब भूल चूका हूँ
तेरे प्यार का घाव है गहरा,
अब तो चले आओ दिलबर
सिर पर मेरे ना सज जाये सेहरा ।
रेशमी बारिश में वक्त है ठहरा,
तेरी यादों के घने कोहरे ने
मेरी साँसो पर लगा दिया है पहरा ।
पूरा शहर भीगा है अबके
घर मेरा क्यों छूट गया है,
इक पागल दीवाना बादल
किसी बात पर शायद रूठ गया है ।
तू आयेगा शायद अब
घर आँगन मेरा महक रहा है,
प्यार तेरा सीने में मेरे
ज्वालामुखी बन दहक रहा है ।
बावरा मन मयूर मेरा होले से
कानों में कुछ बोल गया है,
जिस्म की बात कहूँ क्या तुझसे
अब तो मन भी मेरा डोल गया है ।
रिश्ते नाते सब भूल चूका हूँ
तेरे प्यार का घाव है गहरा,
अब तो चले आओ दिलबर
सिर पर मेरे ना सज जाये सेहरा ।
Sunday, August 1, 2010
तेरा साथ
बहुत पहले जब मैं तन्हा था उदास था
घुप्प अंधेरों का जीवन में मेरे वास था
सूझता नहीं था कुछ घेरे हुए मुझे अवसाद था
गायब था नूर मेरा आँखों में सैलाब था
बोझ लगती थी जिंदगी राहों पर बिछा कांटों का जाल था
मर चुके थे सपने मेरे ना अपने पर विश्वास था
जब मिले तुम तो लगा खुदा को मेरे दुखों का एहसास था
पाकर साथ तेरा मैने अब छू लिया आकाश है
चीरकर अंधेरों को तूने जीवन में किया उजास है
अपने पर से भी ज्यादा मुझे तुंम पर अब विश्वास है
दोस्त तुमसा ना कोई मेरा ना कोई खास है
डर नहीं है मुझे दुनिया का अब तू जो मेरे पास है
बदला है जीवन मेरा खुशियां लेने लगी विस्तार हैं
आज मैं जो कुछ भी हूं ये तेरी दोस्ती का उपहार है।
घुप्प अंधेरों का जीवन में मेरे वास था
सूझता नहीं था कुछ घेरे हुए मुझे अवसाद था
गायब था नूर मेरा आँखों में सैलाब था
बोझ लगती थी जिंदगी राहों पर बिछा कांटों का जाल था
मर चुके थे सपने मेरे ना अपने पर विश्वास था
जब मिले तुम तो लगा खुदा को मेरे दुखों का एहसास था
पाकर साथ तेरा मैने अब छू लिया आकाश है
चीरकर अंधेरों को तूने जीवन में किया उजास है
अपने पर से भी ज्यादा मुझे तुंम पर अब विश्वास है
दोस्त तुमसा ना कोई मेरा ना कोई खास है
डर नहीं है मुझे दुनिया का अब तू जो मेरे पास है
बदला है जीवन मेरा खुशियां लेने लगी विस्तार हैं
आज मैं जो कुछ भी हूं ये तेरी दोस्ती का उपहार है।
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