#मोदीमय भारत -
साल २०१४ के आम चुनाव से काफी पहले ही नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना तय हो चुका था ।
चारों तरफ एक ही चर्चा थी कि "अबकी बार मोदी सरकार" ।
प्रचार भी बहुत जबरदस्त हुआ था । जिधर देखो उधर ही "मोदीफाइड इंडिया", "मोदीमय भारत", "हर-हर मोदी घर-घर मोदी" के नारे सुनाई दे रहे थे । आम चुनाव के नतीजो ने इन सब नारों को जाया नहीं होने दिया । सभी लोग प्रधानमंत्री मोदी की जीत और इन सब नारों मे अपने-अपने हिसाब से सामंजस्य बिठा रहे थे कि चुनावी विजय के साथ ही इंडिया मोदीफाइड और भारत मोदीमय हो चुका है । घर- घर मे मोदी आ चुका है ।
किन्तु विरोधियों का कहना था कि अगर ऐसा होता तो शत - प्रतिशत वोट मोदी को ही मिलने चाहिए थे । इन्ही सब बातों को प्रधानमंत्री ने धता बताते हुए कई कदम अागे बढकर सभी चुनावी नारों को सार्थक किया है । आज जब नजर उठा कर देखते हैं तो पूरा भारत मोदीमय नजर आता है । प्रधानमंत्री के चाहने वाले आज भी बढ ही रहे हैं । प्रशंसक आज भी उनकी कार्यशैली की तारीफ कर रहे हैं । चाहने वालों की नजरों मे आज भी अपने नेता की चमक बरकरार है जबकि किसी की भी चमक फीकी करने के लिए दो साल काफी होते हैं । उसी प्रकार हर विरोधी पार्टी के नेताओं की जुबान पर भी सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी का ही नाम है ।
जिस प्रकार एक अनन्य भक्त प्रातःकाल उठने से लेकर रात्री मे सोने से पहले तक दिनभर ( कई बार तो रातों को नींद से उठकर भी ) केवल भगवान का ही नाम जपता है उसी प्रकार मोदी विरोधी भी प्रधानमंत्री मोदी की ही निंदा करते हैं । सोशल मीडिया पूरे दिन भर प्रधानमंत्री मोदी विरोधी लेखों से अटा रहता है । सभी विरोधी आपसी वैमनस्य भुलाकर मोदी विरोध मे एकजुट हो गयें है ।
कांग्रेस, वामपंथी, लालू, नितीश, मायावती, ममता आदि सभी केवल और केवल प्रधानमंत्री को ही निशाना बनाये हुए हैं । किसी भी राज्य मे कोई भी दुर्घटना हो ( फिर चाहे वो राज्य मुलायम, लालू, नितीश, ममता, केजरी शासित ही क्यो ना हो ) विरोधियों की नजर मे सबका जिम्मेदार प्रधानमंत्री ही होता है ।
प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी का सबसे ज्यादा ध्यान विकास पर रहा है और उससे भी ज्यादा ध्यान पूर्वी भारत तथा जम्मू-कश्मीर पर रहा है, इन सबका प्रमाण प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई पूर्वी राज्यों और जम्मू-कश्मीर की अनेक यात्रांए हैं । अरूणाचल का राजनैतिक हादसा ( कांग्रेस के लिए ) इस बात का प्रमाण है कि पूर्वी भारत मे भी हर हर मोदी घर घर मोदी की शुरूवात हो चुकी है, इस पर मुहर असोम मे प्रधानमंत्री की पार्टी की पहली बार सरकार बनने के साथ ही लग चुकी है ।
जम्मू- कश्मीर मे भी मोदी की पार्टी के द्वारा समर्थित सरकार है ।
हाल ही मे कश्मीर मे हुए दंगे भी अलगाववादियों की मोदी विरोधी मानसिकता ही प्रतीत होती है । केवल दो साल मे ही प्रधानमंत्री मोदी ने जिस प्रकार से जम्मू-कश्मीर की यात्रांए की हैं उससे अलगाववादियों की चूलें हिलने लग गई हैं, उन्हे अपना वजूद खतरे मे पड़ता दिखाई देने लगा है । इसीलिए अलगाववादी कश्मीर के लोगों की गरीबी और वहां के युवाओं की बेरोजगारी का फायदा उठाकर उन्हे समाज और देश विरोधी गतिविधियों में उलझाकर उन्हें आतंक की तरफ धकेल रहे हैं । इस समय अलगाववादियों का एक ही लक्ष्य है कि जैसे भी हो भारत की छवि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय मे खराब करके प्रधानमंत्री मोदी को बदनाम करना है ताकि उन्हे पाकिस्तान से पैसा मिलता रहे और भारत से लड़ाके, मतलब वहां भी मोदी ही मोदी ।
मैं कह सकता हूं कि आज के वक्त -
" क्या प्रशंसक और क्या विरोधी, हर जगह मोदी ही मोदी"
आम चुनावों से पहले "हर-हर मोदी, घर-घर मोदी नारे" का बहुत विरोध हुआ था किन्तु जिस भी इंसान ने ये नारा बनाया था वो बहुत ही दूरदर्शी रहा होगा ।
jitendragautamjaipur.blogspot.com
साल २०१४ के आम चुनाव से काफी पहले ही नरेन्द्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना तय हो चुका था ।
चारों तरफ एक ही चर्चा थी कि "अबकी बार मोदी सरकार" ।
प्रचार भी बहुत जबरदस्त हुआ था । जिधर देखो उधर ही "मोदीफाइड इंडिया", "मोदीमय भारत", "हर-हर मोदी घर-घर मोदी" के नारे सुनाई दे रहे थे । आम चुनाव के नतीजो ने इन सब नारों को जाया नहीं होने दिया । सभी लोग प्रधानमंत्री मोदी की जीत और इन सब नारों मे अपने-अपने हिसाब से सामंजस्य बिठा रहे थे कि चुनावी विजय के साथ ही इंडिया मोदीफाइड और भारत मोदीमय हो चुका है । घर- घर मे मोदी आ चुका है ।
किन्तु विरोधियों का कहना था कि अगर ऐसा होता तो शत - प्रतिशत वोट मोदी को ही मिलने चाहिए थे । इन्ही सब बातों को प्रधानमंत्री ने धता बताते हुए कई कदम अागे बढकर सभी चुनावी नारों को सार्थक किया है । आज जब नजर उठा कर देखते हैं तो पूरा भारत मोदीमय नजर आता है । प्रधानमंत्री के चाहने वाले आज भी बढ ही रहे हैं । प्रशंसक आज भी उनकी कार्यशैली की तारीफ कर रहे हैं । चाहने वालों की नजरों मे आज भी अपने नेता की चमक बरकरार है जबकि किसी की भी चमक फीकी करने के लिए दो साल काफी होते हैं । उसी प्रकार हर विरोधी पार्टी के नेताओं की जुबान पर भी सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी का ही नाम है ।
जिस प्रकार एक अनन्य भक्त प्रातःकाल उठने से लेकर रात्री मे सोने से पहले तक दिनभर ( कई बार तो रातों को नींद से उठकर भी ) केवल भगवान का ही नाम जपता है उसी प्रकार मोदी विरोधी भी प्रधानमंत्री मोदी की ही निंदा करते हैं । सोशल मीडिया पूरे दिन भर प्रधानमंत्री मोदी विरोधी लेखों से अटा रहता है । सभी विरोधी आपसी वैमनस्य भुलाकर मोदी विरोध मे एकजुट हो गयें है ।
कांग्रेस, वामपंथी, लालू, नितीश, मायावती, ममता आदि सभी केवल और केवल प्रधानमंत्री को ही निशाना बनाये हुए हैं । किसी भी राज्य मे कोई भी दुर्घटना हो ( फिर चाहे वो राज्य मुलायम, लालू, नितीश, ममता, केजरी शासित ही क्यो ना हो ) विरोधियों की नजर मे सबका जिम्मेदार प्रधानमंत्री ही होता है ।
प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री मोदी का सबसे ज्यादा ध्यान विकास पर रहा है और उससे भी ज्यादा ध्यान पूर्वी भारत तथा जम्मू-कश्मीर पर रहा है, इन सबका प्रमाण प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई पूर्वी राज्यों और जम्मू-कश्मीर की अनेक यात्रांए हैं । अरूणाचल का राजनैतिक हादसा ( कांग्रेस के लिए ) इस बात का प्रमाण है कि पूर्वी भारत मे भी हर हर मोदी घर घर मोदी की शुरूवात हो चुकी है, इस पर मुहर असोम मे प्रधानमंत्री की पार्टी की पहली बार सरकार बनने के साथ ही लग चुकी है ।
जम्मू- कश्मीर मे भी मोदी की पार्टी के द्वारा समर्थित सरकार है ।
हाल ही मे कश्मीर मे हुए दंगे भी अलगाववादियों की मोदी विरोधी मानसिकता ही प्रतीत होती है । केवल दो साल मे ही प्रधानमंत्री मोदी ने जिस प्रकार से जम्मू-कश्मीर की यात्रांए की हैं उससे अलगाववादियों की चूलें हिलने लग गई हैं, उन्हे अपना वजूद खतरे मे पड़ता दिखाई देने लगा है । इसीलिए अलगाववादी कश्मीर के लोगों की गरीबी और वहां के युवाओं की बेरोजगारी का फायदा उठाकर उन्हे समाज और देश विरोधी गतिविधियों में उलझाकर उन्हें आतंक की तरफ धकेल रहे हैं । इस समय अलगाववादियों का एक ही लक्ष्य है कि जैसे भी हो भारत की छवि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय मे खराब करके प्रधानमंत्री मोदी को बदनाम करना है ताकि उन्हे पाकिस्तान से पैसा मिलता रहे और भारत से लड़ाके, मतलब वहां भी मोदी ही मोदी ।
मैं कह सकता हूं कि आज के वक्त -
" क्या प्रशंसक और क्या विरोधी, हर जगह मोदी ही मोदी"
आम चुनावों से पहले "हर-हर मोदी, घर-घर मोदी नारे" का बहुत विरोध हुआ था किन्तु जिस भी इंसान ने ये नारा बनाया था वो बहुत ही दूरदर्शी रहा होगा ।
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