Tuesday, July 12, 2016

आओ देश सजायें हम

आओ देश सजायें हम
मिट्टी के घरोंदे प्यार से सजायें हम
नफरतें बसी हैं दिलों मे जो
आओ मिलकर दूर भगायें हम
आओ देश सजायें हम ।
रोशनी मोहब्बत की चमकांए हम
उजियारे अपनेपन के फैलायें हम
दरो दीवार मे बस चुकी है जो
उस अंधी कटुता को मिटायें हम
आओ देश सजायें हम ।
मजहबी खेल बहुत खेल चुके हम
खून खराबे बहुत देख चुके हम
अपनों का अपनों से खूब लिया बदला
चलो अब देश के काम आयें हम
आओ देश सजायें हम ।
क्यों आतंकी के साथ हुए हम
स्वर्ग को नर्क बनाने पर क्यों तुले हम
जिन घरोंदो को ढहाया है आज
भूल गये उन्ही मे बहुत खेले हैं हम
आओ देश सजायें हम ।
देश बड़ा या बड़े हैं हम
क्यों देश का मान गिरा रहे हम
हासिल क्या करना है नही मालूम
क्या अपनी राह भटक गये हैं हम
आओ देश सजयें हम ।

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