Tuesday, August 31, 2010

जाने किधर

लो लम्हा-लम्हा करता
देखो वक्त गुजर गया,
कोई मिलकर वहीं रहा
कोई जाने किधर गया ।
सबने अपनी राह पकड़ली
वो प्यारा दोस्त बिछड़ गया,
हाथ पकड़ कर साथ रहे हैं
अब वक्त हाथ से फिसल गया ।
पूरा होते ही देखो पड़ाव
कारवाँ वहाँ से गुजर गया,
कुछ के लिए चली हैं राहें
कुछ के लिए वक्त ठहर गया ।
वादा था साथ चलेंगे हम
वो वादा जाने किधर गया,
भौतिक सुख की अभिलाषा में
साथी जाने किधर गया ।

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