भीगा भीगा सा मौसम है
रेशमी बारिश में वक्त है ठहरा,
तेरी यादों के घने कोहरे ने
मेरी साँसो पर लगा दिया है पहरा ।
पूरा शहर भीगा है अबके
घर मेरा क्यों छूट गया है,
इक पागल दीवाना बादल
किसी बात पर शायद रूठ गया है ।
तू आयेगा शायद अब
घर आँगन मेरा महक रहा है,
प्यार तेरा सीने में मेरे
ज्वालामुखी बन दहक रहा है ।
बावरा मन मयूर मेरा होले से
कानों में कुछ बोल गया है,
जिस्म की बात कहूँ क्या तुझसे
अब तो मन भी मेरा डोल गया है ।
रिश्ते नाते सब भूल चूका हूँ
तेरे प्यार का घाव है गहरा,
अब तो चले आओ दिलबर
सिर पर मेरे ना सज जाये सेहरा ।
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